पुलिस दूरसंचार शाखा म०प्र० भोपाल

पुलिस दूरसंचार शाखा म०प्र० भोपाल

विभागीय संरचनाः -

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ध्येय: -

           आमजनो की  सुरक्षा , सार्वजनिक सुरक्षा एवं आपदा राहत (पीपीडीआर) हेतु मध्यप्रदेश पुलिस को संचार सुविधा उपलब्ध कराना,  नागरिकों की शिकायत पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी आधारित सर्विलेंस सिस्टम का रखरखाव एवं प्रबंधन करना ।

लक्ष्य: -

           मध्यप्रदेश पुलिस दूरसंचार संगठन का द्वारा  आम जनता की सुरक्षा हेतु सतत  (24x7x365 आधारित) मजबूत, एवं सुरक्षित, संचार व्यवस्था स्थापित करना। बाधा रहित एवं सुरक्षित संचार सुनिश्चित करना। साथ ही आमजनो को अत्यंत अल्प समय में उच्च स्तरीय प्रतिक्रिया देने वाला माध्यम उपलब्ध कराना एवं सार्वजानिक स्थान, शहर एवं राजमार्ग सुरक्षा हेतु सीसीटीवी आधारित सर्विलेंस सिस्टम का रखरखाव एवं प्रबंधन करना ।

महत्व: -

              हमारी संस्था टीम के रूप में कार्य करते हुए एवं नई तकनीकियों को सम्मिलित करते हुए संगठनात्मक उपलब्धियां प्राप्त करती है, जो भी कार्य करते है उसमे उत्कृष्ट प्रदर्शन करते है, और यह सुनिश्चित करते है की हमारी गतिविधियाँ प्रभावी एवं कुशलतापूर्ण हो।

अभिप्राय और उद्देश्य: -

             पुलिस दूरसंचार संगठन राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्बाध, विश्वसनीय, तीव्र गति की संचार व्यवस्था प्रदान करता है, ताकि कानून और व्यवस्था के कर्तव्यों, वीवीआईपी दौरे, चुनाव और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर कार्यवाही की जा सके। हमारे कर्त्यव्य इस प्रकार है: -

•    राज्य कमांड और कंट्रोल सेंटर डायल-100 के माध्यम से शहरों में 5 मिनट में और ग्रामीण इलाकों में 30 मिनट में आमलोगों          को जरुरत पर त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है ।

  • आमजनता एवं शहरों की सुरक्षा तथा घटना घटित होने के बाद जांचकर्ता अधिकारी को सबूत उपलब्ध कराने हेतु सुरक्षित सिटी निगरानी प्रणाली (सीसीटीवी नेटवर्क) स्थापित करना ।
  • सार्वजनिक सुरक्षा, वीवीआईपी सुरक्षा, त्यौहारों, मेलों, जुलूस व्यवस्था आदि के दौरान वाहनों और यूएवी (मानवरहित हवाई वाहन) के साथ मोबाइल और हवाई निगरानी प्रदान करना।
  • पुलिस हिरासत के दौरान नागरिकों के मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी आधारित सर्विलेंस सिस्टम स्थापित करना।

मध्यप्रदेश पुलिस दूरसंचार का इतिहास: -

1945-46 में पुलिस रेडियो (वायरलेस) इकाई अस्तित्व में आई थी। शुरूआत में जिला बल एवं विशेष सशस्त्र बल के आरक्षक और प्रधान आरक्षक जो अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान रखते थे इस इकाई के लिए नियुक्त किए गए । चयन के बाद उन्हें रेडियो इकाइयों का उपयोगी सदस्य बनाने के लिए वायरलेस प्रशिक्षण दिया जाता था।

1 नवंबर 1956 को केन्द्रीय प्रांत के 16 जिले, मध्य भारत, विंध्य राज्य और भोपाल राज्य को मध्य प्रदेश राज्य का गठन करने के लिए विलय कर दिया गया। पुलिस बल को संचार सुविधा प्रदान करने के लिए, श्री एन सी रे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो) की अध्यक्षता में एक रेडियो इकाई, की स्थापना की गई थी। भारतीय सेना के अनुपयोगी सेटों के साथ 58 रेडियो स्टेशन स्थापित किए गए थे। वर्ष 1972 में, भारत सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत नए रेडियो स्टेशन खोलने की अनुमति दी और डकैती विरोधी अभियान के लिए कुछ उपकरण प्रदान किए। राज्य सरकार ने उपकरणों को खरीदने के लिए कुछ बजट आवंटित किया। भारत सरकार के आधुनिकीकरण योजना और राज्य सरकार के डकैती विरोधी योजना के तहत अतिरिक्त बल को मंजूरी दी गई थी। उपकरणों के रखरखाव के लिए विज्ञान शिक्षा वाले, कुछ तकनीकी कर्मियों को आरक्षक की योग्यता परीक्षा के माध्यम से चुना गया, इन्हें रेडियो तकनीशियनों के रूप में नियुक्त किया गया था।

डकैती विरोधी अभियान के लिए संचार प्रणाली की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और राज्य संचार प्रणाली को मजबूत करने के लिए, प्रशिक्षित वायरलेस आरक्षक पुलिस स्टेशनों पर तैनात किए गए थे। 1980 के दौरान वीएचएफ संचार प्रणाली को थाना स्तर तक स्थापित किया गया था, उस समय सेना से निकलने वाले बीसी -191 और वाल्व प्रकार के सेट [मुख्यतः बीसी-191, बीसी -375, सफ़ी-62, एचएम-30, एमएफ़-753, जीएच-650, जीएम-750, एलवीएस, जीएच-301, मैनपैक एलवीबी-213, एलवीएम-208, जीवी-650 आदि , ऑटोमेशन मैसेजिंग स्विचिंग सिस्टम (एएमएसएस), सॉलिड स्टेट रेडियो उपकरण, वीएचएफ निचले बैंड सेट्स और आधुनिक फीचर से लैस रिपीटर, 100 वॉट एचएफ वायरलेस सेट, दूरसंचार ऑपरेशन में थे, 1990 के दशक तक इलेक्ट्रॉनिक टेली-प्रिंटर (ईटीपी) और एक्सचेंज का उपयोग किया गया था। साइफर कोडिंग / डिकोडिंग सिस्टम, संचार को विश्वसनीय एवं संचार की गोपनीयता बनाए रखने के लिए व्यावहारिक था। 2004 में बड़े शहरों , उज्जैन, भोपाल, इंदौर और जबलपुर में एपको चरण 1 (पी -25) आधारित रेडियो ट्रंकिंग कम्युनिकेशन सिस्टम की स्थापना की गई थी। 2006 में 38 जिलों में इंटर डिस्ट्रिक्ट एंड इंटर स्टेट मैसेजिंग के लिए पोलनेट स्टेशनों की स्थापना की गई थी। 2014-16 में भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, जांच आदि के लिए पुलिस बल को सहायता प्रदान करने के लिये उन्नत तकनीकी उपकरणों जैसे आईडीटी, एसएमएफ बैटरी यूएवी (इंमैनेंट एरियल वाहन), पीडीए (पर्सनल डिजिटल सहायक), वीएमएस (वैरिएबल मैसेजिंग सिस्टम) को सेवा में लगाया गया था, टेट्रा आधारित संचार रेडियो ट्रंकिंग सिस्टम 2016 में उज्जैन में स्थापित किया गया है। एनालॉग एचएफ सेट 2014 से डिजिटल एचएफ के साथ प्रतिस्थापित किये जा रहे है। इस अवधि के दौरान मोर्सकोड आधारित संचार भी नवीनतम और अधिक विश्वसनीय प्रौद्योगिकी के उपयोग की दृष्टि से छोड़ दिया गया है।  उज्जैन के पुराने एपको फेज-प्रथम रेडियो ट्रंकिंग सिस्टम को ग्वालियर शहर में स्थापना की गई है ।

दूरसंचार शाखा का संगठन: -

पुलिस दूरसंचार मुख्यालय भोपाल में स्थित है; अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुलिस दूरसंचार शाखा के इकाई प्रमुख हैं। राज्य पुलिस दूरसंचार मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (दू/सं) की सहायता के लिए, पुलिस महानिरीक्षक (दू/सं) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो) के पद को मंजूरी दी गई है। 1990 में पुर्न-गठन के बाद, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर रायपुर और बिलासपुर में छह दूरसंचार क्षेत्रीय कार्यालय का गठन पुलिस अधीक्षक के अधीन किया गया। प्रत्येक ज़ोन को दूरसंचार रेंजों में विभाजित किया गया है। जबलपुर जोन में पांच रेंज थे, रेंज स्तर पर डीएसपी (रेडियो) पदनाम के अधिकारी तैनात थे। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद मध्य प्रदेश राज्य से बिलासपुर और रायपुर दूरसंचार जोन छत्तीसगढ़ राज्य में विलय हो गये। वर्ष 2015 में  दो और रेडियो ज़ोन, रीवा और उज्जैन बनाए गए ।

वर्ष 2017 में दूरसंचार शाखा का पुनर्गठन और रेडियो स्टाफ के पुनरीक्षण के 2017 के शासकीय आदेश के बाद जिला स्तर पर एक निरीक्षक स्तर के अधिकारी को प्रभारी अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया है ।

            वर्ष 1990 में रेडियो संवर्ग के पुनर्गठन में, तत्समय की आवश्यकता के अनुसार ऑपरेटर, तकनीशियन और सायफर के तीन संवर्ग बनाए गए थे। जहां कुछ कर्मचारियों को सीधे सहायक उप-निरीक्षक (रेडियो) या प्रधान आरक्षक (रेडियो) तकनीशियनों के रूप में भर्ती किया जाता था, ज्यादातर भर्तियां उपनिरीक्षक और आरक्षक के स्तर पर की जाती थी। कुछ आरक्षकों को तकनीकी स्टाफ के रूप में प्रशिक्षित किया जाता था और प्रधान आरक्षक तकनीशियनों के रूप काम में लिया जाता था। आमतौर पर सीधे भर्ती के आरक्षक ऑपरेटर के रूप में काम करते थे। इन ऑपरेटर आरक्षक (रेडियो)  और प्रधान आरक्षक (रेडियो) में से कुछ कर्मचारियों को स्क्रीनिंग और सायफर प्रशिक्षण दिया जाता था और पदोन्नति की जाती थी और उन्हें सीधे सहायक उप निरीक्षक (साइफर) के रूप में तैनात किया जाता था। उप निरीक्षक(रेडियो)  स्तर पर 50% कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग में सीधे भर्ती किया गया, जबकि पदोन्नत उपनिरीक्षक(रेडियो), उप-निरीक्षक(रेडियो)  तकनीशियन, ऑपरेटर, साइफर संवर्ग का हो सकता है।

2005 -2015 के बीच सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) में क्रांतिकारी बदलाव को दृष्टिगत, 2017 में रेडियो संवर्ग का पुनर्गठन किया गया है। अब सभी नई भर्ती आरक्षकों को तकनीकी के साथ-साथ ऑपरेटरों के बुनियादी पाठ्यक्रम के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा हैं, और सभी प्रधान आरक्षक ऑपरेटर सायफर संदेशों को कोड / डीकोड कर रहे है। प्रधान आरक्षक ऑपरेटरों को प्रधान आरक्षक से सहायक उप-निरीक्षक के लिए प्री-प्रमोशन कोर्स के साथ ही सायफर ट्रेनिंग अनिवार्य रूप से करना होता है। प्रधान आरक्षक और ऊपर के स्तर पर, सभी उप संवर्गों ऑपरेटर, तकनीशियन और सायफर के ट्रेडों को मिला दिया गया है, और हर प्रधान आरक्षक (रेडियो) को तकनीशियन काम के साथ साथ ऑपरेटर को संदेशों की कोडिंग / डीकोडिंग करना है। कंप्यूटर नेटवर्किंग, हार्डवेयर रखरखाव और सॉफ्टवेयर रखरखाव के क्षेत्र में उच्च योग्यता (बी.ई., बी.टेक, बीसीए, एमसीए, आदि) वाले कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी तरह पदोन्नति के समान अवसर प्रदान करने के तकनीकी संवर्ग आरक्षक जैसे फ़िटर, वेल्डर, कारपेंटर, लिए गैर-तकनीकी संवर्ग के आरक्षकों जैसे कुक, नाई, सफाई कर्मचारी, जीडी आरक्षक आदि हेतु प्रधान आरक्षक के सभी पदों को मिला दिया गया है और उन्हें नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपलब्ध कराया गया है।

सभी अंतर जिला रेडियो संचार को विभागीय ई-मेल, एनआईसी मेल और डिजिटल एचएफ में स्थानांतरित कर दिया गया है। तकनीकरूप से लुप्त होने के कारण पोलनेट को अनुपयोगी किया गया है।  पुलिस दूरसंचार संगठन के पास इंदौर में एक प्रशिक्षण केंद्र है, जिसे पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल कहा जाता है, जो आरक्षकों और उप-निरीक्षको को बुनियादी पाठ्यक्रम, पीपी कोर्स, ग्रेड कोर्स और अन्य विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है। पुलिस रेडियो प्रशिक्षण संस्थान का निदेशक एक पुमनि या अमनि पदनाम का अधिकारी हो सकता हैं। इसकी सहयता हेतु एक पुलिस अधीक्षक पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल एवं ०४ उप पुलिस अधीक्षक अधिकारी उपलब्ध।

                                                                 पुलिस दूरसंचार के स्वीकृत पदों का विवरण                 (अक्टूबर 2017 की स्थिति)    

पदनाम

स्वीकृत पद

अति.पुलिस महानिदेशक  (दूसं)

1

पुलिस महानिरीक्षक  (दूसं)

1

निदेशक (दूसं)

1

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो)

1

पुलिस अधीक्षक (रेडियो)

10

उप पुलिस अधीक्षक (रेडियो)

34

निरीक्षक (रेडियो)

113

उप निरीक्षक (रेडियो)

281

उप निरीक्षक (एम.टी.)

1

सहायक उप निरीक्षक (रेडियो)

461

सहायक उप निरीक्षक (एमटी)

2

प्रधान आरक्षक (रेडियो)

710

प्रधान आरक्षक (एमटी)

26

आरक्षक (रेडियो)

1221

आरक्षक (एमटी)

35

आरक्षक (जीडी)

74

आरक्षक (टीएम)

92

कुल

3064

         डायल -100 कमान्ड और कंट्रोल रूम के स्वीकृत पदों का विवरण  

                              (अक्टूबर 2017 की स्थिति)                                                                                                                                      

पदनाम

स्वीकृत पद

पुलिस अधीक्षक

04

उप पुलिस अधीक्षक

12

रक्षित निरीक्षक

01

निरीक्षक

17

सूबेदार

1

उप निरीक्षक

07

सहायक उप निरीक्षक

1

कुल

43

संगठन द्वारा प्रयुक्त विभिन्न दूरसंचार प्रणालियां: -

भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और भारतीय वायरलेस टेलीग्राफ अधिनियम 1933 के तहत भारत सरकार से वायरलेस प्रचालन हेतु सीएमआरटीएस लाइसेंस प्राप्त करने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस विभिन्न रेडियो उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है।

1. वीएचएफ संचार: - जिला मुख्यालय अपने सभी पुलिस स्टेशनों/आउट पोस्ट से वीएचएफ स्टेटिक सेट के माध्यम से जुडे हुए हैं। इसी प्रकार सशस्त्र पुलिस इकाइयां जिलों के साथ वी.एच.एफ. सेट से संबंधित जिलों से जुडे हुए है। संचार उद्देश्य के लिए प्रत्येक पुलिस स्टेशन और आउट पोस्ट पर टावर स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक जिले के लिए हाइड्रोलिक टावर भी उपलब्ध कराए गए हैं। अधिकारी और कर्मचारी भी मेनपैक से और पुलिस वाहन मोबाइल वी.एच.एफ. सेट से सुसज्जित हैं।

                                                                      vhf

2. एचएफ संचार: - सभी जिले सीधे एचएफ संचार पर अपने रेंज मुख्यालय से जुड़े हुए हैं। सभी रेंज मुख्यालय और मध्य प्रदेश भवन नई दिल्ली एच.एफ. सेट से राज्य मुख्यालय भोपाल से जुड़े हुए हैं एनालॉग एच.एफ. को अधिक विश्वसनीय डिजिटल एचएफ सेट के साथ चरणों में बदला जा रहा है।

                                                                 hf

3. आरओआईपी संचार: - सभी जीआरपी पुलिस स्टेशन और आउट पोस्ट आरओआईपी के साथ जुड़े हुए हैं। जीआरपी पुलिस स्टेशन भोपाल जीआरपी कंट्रोल रूम के साथ इंटरनेट पर रेडियो ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (आरओआईपी) पर संचार करते हैं।

4. ई-मेल: - सभी 51 जिले, सभी पुलिस स्टेशन और सभी पुलिस अधिकारियों को राज्य मुख्यालय भोपाल के साथ सीधे इंटरनेट आधारित ई-मेल संदेश संचार से जोड़ा हुआ है। सभी जिले मध्यप्रदेश पुलिस मेल और एनआईसी मेल का उपयोग कर रहे हैं।

                                                                   email

 5. रेडियो ट्रंकिंग सिस्टम: - वीएचएफ संचार नेटवर्क में कंजेशन को कम करने के लिए तथा कई चैनल उपलब्ध कराने के लिए बड़े शहरों  भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में यूएचएफ आधारित रेडियो ट्रंकिंग सिस्टम स्थापित है ।

                                                                   trunk

6. सीयूजी: - पुलिस संचार को मजबूत करने के लिए तथा संचार में सार्वजनिक जीएसएम मोबाइल संचार नेटवर्क की क्षमता का दोहन करने के लिए, प्रदेश सरकार ने प्रदेश पुलिस के लिए 50000 मोबाइल कनेक्शनों  (सिम) की जनवरी 2014 में मंजूरी दी थी, पहले केवल 9410 मोबाइल कनेक्शन प्रदेश पुलिस के लिए मंजूर थे। वर्ष 2017 में 20000 अतिरिक्त कनेक्शन मंजूर किए गए हैं इस प्रकार लगभग 70% पुलिस बल को मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ जोड़ दिया गया है जिसमे उन्हें सीयूजी के माध्यम से मध्य प्रदेश में सतत (24x7) कनेक्टिविटी निशुल्क मुहैया कराई जा रही है। इसके अलावा मध्य प्रदेश शासन ने सभी डीएसपी और ऊपर रैंक के फील्ड और संचार अधिकारियों को ब्रॉड-बैंड डेटा कनेक्टिविटी की भी स्वीकृति प्रदान की है ताकि वे अपनी कार्य दक्षता में सुधार तथा आधिकारिक काम में इंटरनेट की क्षमता का इस्तेमाल करने में सक्षम हो सके।

                                                                      cug

डायल 100 आधारित केन्द्रीयकृत राज्य स्तरीय आपातकालीन रिस्पांस कमांड और कंट्रोल रूम: -

मध्य प्रदेश में 1 नवंबर 2015 को, राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पुलिस इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम स्थापित किया है। परियोजना के तहत भोपाल में कार्य विशेष कंप्यूटर सर्वर, कंप्यूटर टेलिफोनी इंटरफेस, कंप्यूटर सहायता प्राप्त डिस्पैच, जीपीएस, जीआईएस मैप्स, वॉयस लॉगर से सुसज्जित एक कॉल सेंटर स्थापित किया गया है। पूरे राज्य में 1000 एफआरवी (प्रथम रिस्पांस वाहन) तैनात किए गए हैं। प्रत्येक एफआरवी (प्रथम रिस्पांस वाहन) मोबाइल डाटा टर्मिनल, जीपीएस, पीए सिस्टम, पुलिस वायरलेस, अग्निशमन यंत्र, फर्स्टएड बॉक्स, इमरजेंसी रिस्पांस टूल आदि से लैस है। 02 पुलिस कर्मचारी प्रत्येक वाहन में 24 घंटे आम लोगों को राहत देने के लिए मौजूद रहते है। पुलिस सहायता प्राप्त करने के लिए किए गए सभी टेलीफोन कॉल, राज्य के आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र पर प्राप्त किए जाते हैं और प्रथम रिस्पांस वाहन (एफआरवी) नागरिकों को शहरी इलाकों में 5-10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30-45 मिनट के भीतर संकट में सहायता हेतु यहां से भेजे जाते हैं । इन प्रथम रिस्पांस वाहनों द्वारा दैनिक लगभग 6000 स्थानों का दौरा किया जा रहा है। इस सेवा को आम लोगों के बीच व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त हुई है और यह बेहद लोकप्रिय है। कई राज्य पुलिस संगठनों ने परियोजना में गहरी रूचि दिखाई है

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सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली: -

प्रदेश में सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने और भीड़ भरे सार्वजनिक स्थानों पर नजर रखने के लिए क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) आधारित सुरक्षा और निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। 61 शहरों के 2000 सार्वजनिक स्थानों को भोपाल स्थित राज्य स्तर के केंद्रीकृत सुरक्षित शहर मोनोटरिंग रिस्पांस सेंटर (एससीएमआरसी) के तहत अन्तर्निहित किया गया है। योजना के तहत लगभग 10000 कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं, शहरों में और राजमार्गों पर सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित करने के लिए 80 मोबाइल निगरानी वैन भी खड़े किए गए हैं। 50 मध्यम और छोटे शहरों में डेटा ट्रांसमिशन के लिए पुलिस खुद ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क स्थापित कर रही है। सीसीटीवी को उज्जैन सिंहस्थ (कुंभ) मेला 2016 के दौरान जहां 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने 30 दिनों में मंदिर एवं शहर का दौरा किया था, में बहुत उपयोगी पाया गया है ।

                          पीएस सीसीटीवी मॉनिटर                                             सीसीटीवी कंट्रोल रूम

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   संगठन के भविष्य की योजना : -

मध्यप्रदेश पुलिस दूरसंचार ने सार्वजनिक सुरक्षा हेतु संचार व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया, शहरों और राजमार्गों में खुले सार्वजनिक स्थान की निगरानी, ​​और आंतरिक क्षमता के प्रबंधन के क्षेत्र में दुनिया भर की तकनीकी उन्नति के साथ पुलिस विभाग को अद्यतन रखने के लिए 7 साल और 15 साल की भविष्य योजना तैयार की है। ऐसी योजनाएं निम्नानुसार हैं: -

1. ईआरपी (उद्यम संसाधन योजना) पुलिस डेटा संग्रहण केंद्र का कार्यान्वयन और निर्माण।

2. अनाधिकृत ड्राइविंग की रोकथाम के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (आरएफआईडी) टैग और वाहन लॉगर-आरएफआईडी और बार  कोड आधारित इन्वेंट्री प्रबंधन -जियो टैगिंग इन्वेंट्री।

3. मोबाइल एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म 4 जी / एलटीई सक्षम पीडीए, फिंगरप्रिंट स्कैनर जैसे बॉयोमेट्रिक डिवाइस से लैस आईरिस स्कैनर, जो किसी व्यक्ति / वाहन को तुरंत पहचानने के लिए आपराधिक और वाहन डाटाबेस तक पहुंचने में सक्षम है।

4. वृहद सूचना डेटा विश्लेषण और सामाजिक मीडिया / वेब निगरानी उपकरण का क्रियान्वयन।

5. आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ एवं उन्नयन करना।

6. कस्बों और राजमार्गों पर सीसीटीवी आधारित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं उन्नयन करना।

7. मोबाइल निगरानी वाहन- (निजी वाहन के साथ, स्वामित्व के आधार पर) अनुबंध के आधार पर की सिफारिश की गई है ।

8. यूएवी (ड्रोन) का उन्नयन-क्वैडकोप्टर्स, नैनो-हामिंग बर्ड, नीची उड़ान कैमरों के साथ ।

9. कैमरा सिस्टम- स्थापित करना जो कि गीगापिक्सल की सूक्ष्म छवियों को कैप्चर करने में सक्षम है।

10.मध्य प्रदेश राज्य की 3-डी इमेज मॉडलिंग के द्वारा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट (पीओआई) के संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

11.लोक सुरक्षा हेतु ब्रॉडबैंड संचार नेटवर्क / ऑप्टिकल फाइबर कम्यूनिकेशन (ओएफसी) नेटवर्क का निर्माण।

12. बड़े शहरों के पुलिस संचार के लिए तथा आपातकाल संचार हेतु गुब्बारा आधारित ऐन्टेना स्थापित करना ।

13. डिजिटल ट्रंकिंग रेडियो सिस्टम - डिजिटल और जीपीएस सक्षम बहु चैनल रेडियो सिस्टम।

14. सुरक्षित डिजिटल वीएचएफ संचार नेटवर्क और डिजिटल एचएफ संचार नेटवर्क स्थापित करना ।

15. सुरक्षित और विश्वसनीय संचार के लिए सैटेलाइट आधारित संचार और वी-सेट स्थापित करना ।

16. सभी जिले के लिए मोबाइल (वाहन) कर्मशाला सह चलित संचार सुविधा उपलब्ध कराना ।

17. चलित (वाहन) बैटरी चार्ज बैंक / बैटरी चार्जर्स।

18. - सार्वजनिक स्थानों पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों के लिए शरीर पर धारण करने वाला कैमरा क्रय करना।

19. शहरों के भीतर बेहतर यातायात प्रबंधन और प्रवर्तन के लिए एवं बड़े राजमार्गों पर स्वचालित संख्या  प्लेट (एएनपीआर) और रेड लाइट उल्लंघन जांच (आरएलवीडी) प्रणाली और एकीकृत ई-चालान सिस्टम।

20. चौराहों एवं पैदल पार पथ सड़कों पर सार्वजनिक उद्घोषणा तंत्र स्थापित करना ।

                                                     पुलिस दूरसंचार मुख्यालय भदभदा रोड भोपाल

स क्र

पदनाम

एसटीडी कोड

लैंडलाइन / फ़ैक्स

मोबाइल

ईमेल

कार्यालय

फैक्स

1

अमनि (दू/सं) म.प्र. भोपाल

0755

2443670

2443670

7049100670

adg_telecom@mppolice.gov.in

2

अमनि /निदेशक  पीआरटीएस  इंदौर

0731

2419410

2419410

7049100673

 

3

पुमनि(दू/सं) एमपी भोपाल

0755

2443672

2443672

 

igp_telecom@mppolice.gov.in

4

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो) भोपाल

0755

2443674

2443674

7049100674

ssp_radio@mppolice.gov.in

5

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) भोपाल जोन भोपाल

0755

2769888

 

7049100857

spradio_bpl@mppolice.gov.in

6

पुलिस अधीक्षक  डायल 100 भोपाल

0755

2777322

 

7049100862

amitsps@yahoo.co.in

7

पुलिस अधीक्षक  (रेडियो) डायल 100 और प्रोक्योरमेंट्स भोपाल

0755

2767299

 

7049100864

spdial100@gmail.com

8

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) भोपाल आईसी सीसीटीवी और कर्मशाला

0755

2767113

 

7049100861

neetukatarathakur@gmail.com

9

एआईजी रेडियो मुख्यालय भोपाल

0755

2777506

 

7587609393

pranjalishukla23@gmail.com

10

पुलिस अधीक्षक  (रेडियो) मुख्यालय,संचार भोपाल

0755

 

 

7049100851

spradio_commn@mppolice.gov.in

11

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) पीआरटीएस इंदौर

0731

2610152

2610152

7049100885

spr_prts@mppolice.gov.in

12

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) जबलपुर जोन

0761

2676223

2676123

7049100882

spradio_jbp@mppolice.gov.in

13

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) उज्जैन जोन

0734

2527135

 

7049100856

spradio_ujn@mppolice.gov.in

14

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) ग्वालियर जोन

0751

2445281

2445281

7049100852

spradio_gwl@mppolice.gov.in

15

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) इंदौर जोन

0731

2610062

2610062

7049100853

spradio_ind@mppolice.gov.in

16

पुलिस अधीक्षक (रेडियो) रीवा जोन

07662

252230

 

7049100855

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