पुलिस बल की क्षमता वृद्धि और नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने की योग्यता ही सायबर अपराधों से सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करेगी- डीजीपी श्री सुधीर सक्सेना

पुलिस बल की क्षमता वृद्धि और नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने की योग्यता ही सायबर अपराधों से सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करेगी- डीजीपी श्री सुधीर सक्सेना

September 22, 2022

दस दिवसीय चतुर्थ सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एण्‍ड इंटेलीजेंस समिट-2022 (सीआईआईएस) का हुआ समापन

पहली बार हाइब्रिड मॉड पर हुआ आयोजन

चार अंतर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों सहित 57 विशेषज्ञों ने किया ज्ञान साझा

भोपाल। मैं एक ऐसे भविष्‍य की कल्‍पना कर रहा हूँ जहां हम अपराधियों से आगे की सोच रहे हों। इंटरनेट की भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं अत: सायबर अपराध भी वैश्विक हैं। देश और दुनिया के साझा प्रयास ही सायबर अपराध रोकथाम में सहायक होंगे। सीआईआईएस इस दिशा में मील का पत्‍थर साबित होगी। पुलिस बल के हर स्‍तर पर क्षमता निर्माण और उपलब्‍ध प्रौद्योगिकियों तथा नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने की योग्‍यता ही सायबर अपराधों से सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करेगी। उक्‍त उद्गार पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्‍सेना ने आज आर.एस.पी.वी.नरोन्‍हा प्रशासन अकादमी भोपाल में मध्‍यप्रदेश सायबर पुलिस द्वारा आयोजित दस दिवसीय सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एण्ड इंटेलीजेंस समिट (सीआईआईएस-4) के समापन अवसर पर व्‍यक्‍त किए।

      डीजीपी श्री सक्‍सेना ने कहा कि टेक्‍नोलॉजी सुलभ होने से हमारी सोच से अधिक सायबर अपराध हो रहे हैं। वर्ष 2020 में इस तरह के 50 हजार से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए। सीआईआईएस जैसे आयोजन इन सायबर अपराधों की रोकथाम में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पूरे देश के कानून प्रवर्तन अधिकारियों को एक साझा प्‍लेटफार्म उपलब्‍ध कराने का असाधारण और कठिन कार्य था सीआईआईएस जिसे मध्‍यप्रदेश सायबर पुलिस टीम ने कुशलता से पूरा किया।

      डीजीपी ने कहा कि पिछले दस दिनों में समिट के दौरान कई तकनीकी आयामों के विषय में हमारे बलों का ज्ञानवर्धन हुआ है। इसमें डिजिटल फोरेंसिक, सायबर अपराध्‍ से संबंधित कानून, क्रिप्‍टोकरेंसी, डेटा प्रायवेसी, सायबर फ्राड/धमकी सहित कई विषय शामिल हैं। अंतर्राष्‍ट्रीय सायबर विशेषज्ञों के कीनोट्स ने प्रतिभागियों को वैश्विक स्‍तर पर संभावनाओं की जानकारी दी तथा उन प्रकरणों पर विचार-विमर्श हुआ जिन्‍हें अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग से सुलझाने में सहायता मिली।

      डीजीपी श्री सक्‍सेना ने समिट के सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस समिटमें 6819 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। दस दिनों में 44 घंटों से अधिक के व्‍याख्‍यान हुए तथा चार अंतर्राष्‍ट्रीय सायबर विशेषज्ञों सहित 57 विशेषज्ञों ने व्‍याख्‍यान दिए। उन्‍होंने कहा कि हम इस समिट का समापन एक बेहतर सुप्रिशिक्षित बल, नई अनुभूत तकनीकों और अनंत संभावनाओं के साथ कर रहे हैं जो देश की कानून प्रर्वतन एजेंसियां प्राप्‍त कर सकती हैं।

      श्री सक्‍सेना ने कहा कि चुनौती बड़ी है पर मनोबल ऊंचा रखें। सायबर विशेषज्ञों से सतत् जीवंत संपर्क रखें ताकि तकनीकों से अपडेट रहें। सायबर सेल तथा जिला सायबर सेल पूर्ण सक्रिय रहे। टेलेंट हंट के द्वारा आरक्षक और प्रधान आरक्षकों को सायबर सेल के लिए चयनित किया जाए। स्‍पेशल कोर्स तथा गहन प्रशिक्षण प्रदान करें।सायबर मनी फ्रॉड को जैसे दुर्घटना में गोल्‍डन ऑवर होते हैं इतनी गंभीरता से लें ताकि पीडि़त व्‍यक्ति का पैसा सुरक्षित किया जा सके। 24*7 सायबर हेल्‍प लाइन आदि भी सायबर क्राइम की रोकथाम में सहायक होगी।

      अतिरिक्‍त पुलिस महानिदशेक सायबर श्री योगेश देशमुख ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जितनी तेजी और जटिलता से सायबर क्राइम बढ़ रहे हैं उतनी ही तीव्रता से पूरे सिस्‍टम को सक्षम किया जाना ही इस समिट का उद्देश्‍य है। प्रतिभागियों का फीडबैक बहुत गुणवत्‍ता युक्‍त रहा। इस समिट से हम ज्‍यादा जागरूक और नवीन तकनीकों से अद्यतन हुए हैं। इंवेस्टिगेशन के नए आयाम सीखने का अवसर मिला है।

      समापन समारोह को यूनिसेफ (म.प्र.) के प्रतिनिधि श्री लॉलीचेन पी.जे., क्लियर ट्रेल के संस्‍थापक श्री मनोहर कटोच,सॉफ्टक्लिक के संस्‍थापक श्री संजय शर्मा ने भी संबोधित किया। 

      समिट के समापन अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर, श्री चंचल शेखर, श्री विजय कटारिया सहित समिट के आयोजन से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद थे।

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