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भा.द.वि. धारा 182 - जो कोई किसी लोक सेवक को कोई ऐसी इत्तिला, जिसके मिथ्या होने
का उसे ज्ञान या विश्वास है, इस आशय से देगा कि वह उस लोक सेवक को प्रेरित करें या
यह सम्भाव्य जानते हुए देगा कि वह उसको एतद द्वारा प्रेरित करेगा कि वह लोक सेवक
ऐसे लोक सेवक की विधि पूर्ण शक्ति का उपयोग करे जिस उपयोग से किसी व्यक्ति की क्षति
या लोभ हो, वह दोनो में से, किसी भॉंति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो
सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रूपये तक हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया
जायेगा ।
भा.द.वि. धारा 211-जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति
के विरूद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है
क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरूद्ध को दाण्डिक कार्यवाही संस्थित
करेगा या करवाएगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाएगा कि उसने अपराध किया है वह
दोनों में से किसी भॉंति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या
जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा । तथा यदि ऐसी दाण्डिक कार्यवाही
मृत्यु, (आजीवन कारावास) या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय अपराध के
मिथ्या आरोप पर संस्थित की जाए, तो वह दोनों में से किसी भॉंति के कारावास से,
जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा, और जुर्माने से भी
दण्डनीय होगा ।
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